एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता / अर्जुन देव

एक घड़ी न मिलते ता कलियुगु होता।।
हुणे कदि मिलीए प्रीअ तुधु भगवंता।।
मोहि रैणि न विहावै नीद न आवै बिनु देखे गुर दरबारे जीउ।।1।।
हउ घोली जीउ घोलि घुमाई तिसु सचे गुर दरबारे जीउ ।।2।।

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