छोटा मेरा खेत व्याख्या | Chota Mera Khet Vyakhya : उमाशंकर जोशी

‘छोटा मेरा खेत’ उमाशंकर जोशी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण कविता है। इस पोस्ट के अंदर हमने  छोटा मेरा खेत कविता की व्याख्या को शब्दार्थ सहित प्रस्तुत किया है। यह कविता 12th Class NCERT की परीक्षा के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण है। छोटा मेरा खेत व्याख्या | Chota Mera Khet Vyakhya : Umashankar Joshi.

छोटा मेरा खेत व्याख्या

छोटा मेरा खेत चौकोना
कागज़ का एक पन्ना,
कोई अंधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज वहाँ बोया गया।

शब्दार्थ :- चौकोना = चार कोनों वाली, चौकोर। पन्ना = पृष्ठ, पेज। अंधड़ = आँधी, (भावनात्मक आँधी) । क्षण =पल।

प्रसंग :- प्रस्तुत काव्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य-पुस्तक ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवि उमाशंकर जोशी द्वारा रचित ‘छोटा मेरा खेत’ नामक कविता से अवतरित है। इसमें कवि ने कवि-कर्म को खेती के रूपक द्वारा अभिव्यक्त किया है।

व्याख्या :- कवि कागज को खेत का रूपक प्रदान करते हुए कहते हैं कि मेरा कागज का एक पृष्ठ चौकोर खेत की तरह है। मैं इसी कागज़ रूपी चौकोर खेत पर कविता को शब्दबद्ध करता हूँ। कवि का कथन है कि कोई भावनात्मक रूपी आँधी कहीं से आई जिसके प्रभाव से मैंने कागज़ पृष्ठ रूपी खेत में रचना विचार और अभिव्यक्ति रूपी बीज बो दिया। अर्थात् मैंने भावनात्मक होकर कागज़ के पृष्ठ पर किसी अभिव्यक्ति को शब्दबद्ध कर दिया।

  • विशेष :- इस पद्य में कवि-कर्म को खेती के रूपक द्वारा अभिव्यक्त किया है।
  • प्रतीकात्मक शैली का प्रयोग किया गया है।
  • सरल, सहज, भावानुकूल खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है।

कल्पना के रसायनों को पी
बीज गल गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव- पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

शब्दार्थ :- निःशेष = समाप्त, जिसमें कुछ भी शेष न हो। शब्द के अंकुर = शब्द रूपी अंकुर। फूटे = पैदा हुए। पल्लव = पत्ते। पुष्पों =फूलों से। नमित झुका हुआ।

प्रसंग :- ये पंक्तियाँ ‘आरोह भाग-2’ में संकलित कवि ‘उमाशंकर जोशी’ द्वारा रचित ‘छोटा मेरा खेत’ नामक कविता से अवतरित हैं। इनमें कवि ने पृष्ठरूपी खेत में कवि-कर्म को विकसित होता हुआ दिखाया है।

व्याख्या :- कवि का कथन है कि मैंने कागज के पृष्ठ रूपी खेत में जो अभिव्यक्ति रूपी बीज बोया था। वह बीज कल्पना रूपी रसायन तत्वों को पीकर पूरी तरह से गलकर समाप्त हो गया। तत्पश्चात् उसमें से शब्द रूपी अंकुर प्रस्फुटित हुए। अर्थात् जिस प्रकार से खेत में बीज बोकर किसान उसमें अनेक प्रकार के रसायन तत्वों का प्रयोग करता है।

तब जाकर वह बीज अंकुरित होता है। उसी प्रकार कवि पृष्ठ पर विचारों का बीज बोकर उसमें कल्पना का रसायन डालता है। तत्पश्चात् वह बीज शब्दों के रूप में अंकुरित होता है। उसके बाद शब्द रूपी अंकुर-अंकुरित होकर धीरे-धीरे विकसित होते छंदों रूपी पत्तों और फूलों से गुच्छे हुए एक संपूर्ण कृति का रूप ग्रहण कर लेते हैं अर्थात् जैसे खेत में बीज अंकुरित होता फिर उस पर पत्ते और फूल आते हैं तब उसके बाद वह पूर्णता को प्राप्त करता है वैसे ही कवि-कर्म शब्दों को छंदों में बांधता हुआ एक संपूर्ण कृति के रूप में प्रकट होता है।

Chota Mera Khet Vyakhya

झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का
छोटा मेरा खेत चौकोना।

शब्दार्थ :- रस = साहित्य या काव्य से प्राप्त आनंद, फल का रस। अलौकिक = अनूठा। रोपाई = बीजना, बीज बोने की क्रिया। अनंतता = अनंतकाल की, सदा। जरा =थोड़ा। अक्षय = जो ख़त्म न हो।

प्रसंग :- प्रस्तुत अवतरण ‘आरोह भाग-2’ में संकलित ‘छोटा मेरा खेत’ नामक कविता से अवतरित किया गया है जिसके कवि ‘उमाशंकर जोशी’ जी हैं। इसमें कवि ने साहित्य के रसानंद की अनंतता का चित्रण किया है।

व्याख्या :- कवि का कथन है कि साहित्यिक कृति से अलौकिक रसरूपी फल प्रकट होने लगे। एक क्षण भर की रोपाई के परिणामस्वरूप अमृत रूपी रस की अलौकिक धाराएँ फूटने लगी हैं। कवि कहता है कि यह अमृत रूपी रस धारा अनंतकाल तक चलने वाली कटाई के समान है। कवि का अभिप्राय यह है कि खेत में पैदा होने वाला अन्न पकने के बाद कट जाता है, वह समाप्त हो जाता है लेकिन उत्तम साहित्य की रस धारा कभी समाप्त नहीं होती।

यह रस धारा पाठकों द्वारा बार-बार पढ़ी जाती है लेकिन फिर भी जरा-सी भी कम नहीं होती है अर्थात् साहित्य की रस धारा को पाठक बार-बार लूटने का प्रयास करता है। लेकिन यह अमृत धारा पाठकों के अनेक बार लूटने पर भी थोड़ी-सी कम नहीं होती है। साहित्य में ख़त्म न होने वाली रस-धारा सदा के लिए होती है। वह अनंतकाल तक भी ख़त्म नहीं होती। कवि कहते हैं कि मेरा कागज़ का पृष्ठ रूपी छोटा खेत चौकोर है। कवि का अभिप्राय यह है कि मेरा पृष्ठ रूपी खेत बहुत छोटा है लेकिन उससे जो साहित्य की अमृत रस-धारा प्रकट हुई है। वह अनंतकाल तक भी ख़त्म न होने वाली है।

  • विशेष :- इस पद्य में कवि ने साहित्य के रसानंद की अनंतता का चित्रण किया है।
  • काव्य की भाषा शुद्ध साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग हुआ है।
  • मानवीकरण अलंकार प्रयुक्त हुआ है।
  • शांत रस का प्रयोग हुआ है।

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