कृष्णा सोबती का जीवन परिचय / Krishna Sobti Ka Jivan Parichay

नमस्कार प्यारे दोस्तों, आपका हमारे हिंदीशाला ब्लॉग पर एक बार फिर से स्वागत है। आज के इस आर्टिकल में हम कृष्णा सोबती का जीवन परिचय को पढ़ने जा रहें है। आप कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएँ, साहित्यिक विशेषताएं और भाषा शैली को भी पढ़ सकते है। इसी प्रकार के अन्य जीवन परिचय पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट को विजिट करते रहें।

कृष्णा सोबती का जीवन परिचय

महिला कथा लेखिकाओं में कृष्णा सोबती का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने न केवल कहानी और उपन्यास लेखिका के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की, अपितु अन्य गद्यात्मक विधाओं पर भी सफलतापूर्वक लेखनी चलाई है। इनका जन्म वर्ष 18 जनवरी 1925 ई. को गुजरात (पश्चिमी वर्तमान में पाकिस्तान) नामक स्थान पर हुआ था। इनके आरंभिक शिक्षा स्थायी  स्कूल में हुई,बाद में इन्होंने लाहौर, दिल्ली व शिमला आदि स्थानों पर शिक्षा प्राप्त की है। इनका संबंध दिल्ली प्रशासन के प्रोड शिक्षा विभाग से भी रहा है इन हिंदी साहित्य अकादमी, हिंदी अकादमी, शिरोमणि सम्मान आदि से भी सम्मानित किया गया। इन्हें साहित्य अकादमी की सदस्यता भी प्राप्त थी।

कथाकार कृष्णा सोबती की दो बहनें पहली बहन राज चोपड़ा दूसरी सुषमा अब्बी तथा एक भाई जगदीश सोबती है। सभी भाई-बहनों पर पारिवारिक संस्कृति और संस्कारों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। सभी भाई-बहनों को किताबों से विशेष लगाव था।सोबती जी कहती हैं- ‘‘जेसे-जेसे हम भाई-बहन बड़े होते गए, रूचि के मुताबिक अपनी-अपनी पसंद की किताबों के नजदीक पहुंचते गए।” कृष्णा सोबती जी का निधन 25 जनवरी 2019 ई. को हो गया था। 

Krishna Sobti Ka Jivan Parichay

नाम कृष्णा सोबती
जन्म 18 जनवरी 1925 ई.
जन्म स्थान गुजरात (पश्चिमी वर्तमान में पाकिस्तान)
पिता का नाम दीवान पृथ्वी राज सोबती
माता का नाम दुर्गा देवी
प्रमुख रचनाएँ जिंदगीनामा, समय सरगम, डार से बिछुड़ी, बादलों के घेरे
निधन 25 जनवरी 2019 ई.
जीवंत आयु 94 वर्ष

कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएं

 निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि कृष्णा सोबती बहुमुखी प्रतिभा की स्वामिनी है। इन्होंने उपन्यास, कहानी, रेखा चित्र, शब्द चित्र, संस्मरण आदि विविध विधाओं पर सफलतापूर्वक लेखनी चलाई है। इन की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है—

उपन्यास— ‘ जिंदगीनामा, ‘समय सरगम’, ‘ऐ लड़की’, ‘दिलो दानिश’ आदि।

कहानियां— ‘ मित्रो मरजानी’, ‘डार से बिछुड़ी’, ‘बादलों के घेरे’, ‘सूरजमुखी अंधेरे के’।

संस्मरण एवं रेखाचित्र— ‘शब्दों के आलोक में’, ‘हम-हशमत आदि।

कृष्णा सोबती की साहित्यिक विशेषताएं

कृष्णा सोबती की रचनाओं का आधार संवेदनात्मक अनुभूति है इनकी रचनाओं में आत्मीयता का भाव सर्वत्र देखा जा सकता है। कलात्मक की दृष्टि से भी कृष्णा सोबती की रचनाएं उत्कृष्ट है।

नारी जीवन की परिवर्तित मनोस्थितियों एवं दमित इच्छाओं को इन्होंने अपनी रचनाओं में उत्साहपूर्वक उद्घाटित किया है। इनकी रचनाओं की अन्य प्रमुख विशेषता है कि इन्होंने जीवन का विवेचन एवं विश्लेषण यथार्थ के धरातल पर किया है। समाज में व्याप्त सामाजिक विसंगतियों को भी गहराई से परखा एवं समझा है और यथार्थ एवं सूक्ष्मतापूर्वक अपनी रचना में उनको दिखाया है।

कृष्णा सोबती की रचनाओं में देश की संस्कृति की झलक सर्वत्र देखी जा सकती है और देश की माटी की खुशबू भी अनुभव की जा सकती हैं। इनकी रचनाओं में पाठक के हृदय को छू जाने की क्षमता भी निरंतर देखी जा सकती है।

कृष्णा सोबती की भाषा शैली

 कृष्णा सोबती के साहित्य का कला पक्ष भाव पक्ष की भांति ही विकसित एवं समृद्ध है। उनकी रचनाओं में अभिव्यक्ति का अनोखा अंदाज भी देखते ही बनता है। इनकी रचनाओं की भाषा-शैली प्रवाहयुक्त एवं यथार्थवादी। थोड़े शब्दों के माध्यम से पूरे विषय को कह देना इनकी रचनाओं की अन्य प्रमुख विशेषता है।

इनकी रचनाओं में अंग्रेजी-उर्दू शब्दावली का प्रयोग भी देखते ही बनता है। आधुनिक हिंदी लेखिकाओं में कृष्णा सोबती का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। भाव-प्रवणता,आत्मीयता, युग-बोध आदि इनकी रचनाओं की अन्य प्रमुख विशेषताएं हैं।

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