सैयद हैदर रजा जीवन परिचय | Sayed Haider Raza Biography in Hindi

सैयद हैदर रजा जीवन परिचय

सैयद हैदर रजा जीवन परिचय

सैयद हैदर रजा का जन्म सन् 1922 में बाबरिया गाँव में हुआ। यह गाँव मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। सैयद हैदर रजा एक प्रसिद्ध चित्रकार होने के साथ-साथ एक अच्छे लेखक भी थे। पिता के रिटायर होने के बाद उन्हें नौकरी हरनी पड़ी। उन्होंने चित्रकला की शिक्षा नागपुर स्कूल ऑफ आर्ट और सर जे०जे० स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई से ग्रहण की। उन्होंने भारत में अनेक प्रदर्शनियों आयोजित की। सन् 1950 में वे फ्रांसीसी सरकार की छात्रवृत्ति पर फ्रांस गए और अध्ययन दिया। जिन कलाकारों ने आधुनिक भारतीय कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया, उनमें हुसैन और सूजा के बाद रजा का नाम सम्मान ‘ग्रेड ऑव ऑफिसर ऑव द ऑर्डर ऑय आर्ट्स ऐंड लेटर्स’। 

निधन वर्ष

सैयद हैदर रजा की मृत्यु 94 वर्ष की आयु में नई दिल्ली 22 जुलाई 2017 को हुई। अपनी मृत्यु के अंतिम दिनों तक भी ये काम में व्यस्थ रहें। सैयद हैदर रजा की अंतिम इच्छा के अनुसार ही निधन के पश्चात इनकी कब्र उनके पिता की कब्र के साथ में बनाई गयी थी।

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सम्मान एवं पुरस्कार

  • 1946: सिल्वर मेडल, बॉम्बे आर्ट सोसाइटी, मुंबई
  • 1948: गोल्ड मेडल, बॉम्बे आर्ट सोसाइटी, मुंबई
  • 1956: प्रिक्स डे ला क्रिटिक, पेरिस
  • 1981: पद्म श्री; भारत सरकार
  • 1984: ललित कला अकादमी, नई दिल्ली की फैलोशिप
  • 1993: कालिदास सम्मान, मध्य प्रदेश सरकार
  • 2004: ललित कला रत्न पुरस्कार, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली
  • 2013: पद्म विभूषण; भारत सरकार
  • 2013: महानतम जीवित वैश्विक भारतीय किंवदंतियों में से एक
  • 2014: डी. लिट (ऑनोरिस कौसा), इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, छत्तीसगढ़
  • 2015: कमांडर डे ला लेगियन डी’होनूर (द लीजन ऑफ ऑनर); फ्रांस गणराज्य
  • 2015: डी. लिट (ऑनोरिस कौसा), शिव नादर उन

प्रमुख रचनाएँ

इनकी प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है-

(i) मोनोग्राफ – मिशेल एवेयर, ‘जाक लासें’, ‘पियरे गोदिबेयर’, ‘गाँति सेन’, ‘रुडॉल्फ यॉन लेडेन’ आदि।

 (ii) आत्मकथा ‘आत्मा का ताप’ ।

भाषा-शैली

सैयद हैदर रजा की आत्मकथात्मक पुस्तक ‘आत्मा का ताप’ मूलतः अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। इसका ग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद मधु वी०जोशी ने किया है। हिंदी में अनुवादित इस रचना में उर्दू और अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों का अधिक प्रयोग हुआ है। तत्सम शब्दों का प्रयोग भी इनकी रचनाओं में हुआ है। इनकी रचनाओं की भाषा भावानुकूल है।

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